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वन पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

प्रतिभागियों को दी गई महत्वपूर्ण जानकारियां

वन पंचायतों की भूमिका को सुदृढ़ बनाने और जन-सहभागिता आधारित वन प्रबंधन को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से वन चेतना केन्द्र चम्पावत में वन पंचायतों के सरपंचों और सदस्यों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों को उनके अधिकार, कर्तव्य, विधिक प्रावधानों और वन संरक्षण से जुड़ी आधुनिक चुनौतियों की जानकारी दी गई।

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मुख्य प्रशिक्षक डॉ. डीके जोशी (प्रमुख वन संरक्षक कार्यालय, देहरादून) ने वन पंचायतों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सामाजिक-आर्थिक महत्व और वर्तमान संदर्भ में उनकी भूमिका पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि वन पंचायतें राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में सामुदायिक वानिकी की रीढ़ रही हैं, और आधुनिक चुनौतियों के बीच स्थानीय समुदाय की मजबूत सहभागिता अत्यंत आवश्यक हो गई है।

 

उन्होंने वन पंचायत नियमावली 2005 (संशोधन 2024) के प्रमुख प्रावधानों को समझाते हुए बताया कि नई नियमावली ने पंचायतों के अधिकारों, निर्णय प्रक्रिया, वित्तीय प्रबंधन और ग्रामसभा की भूमिका को अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनाया है। कार्यक्रम में (माइक्रो प्लान) विषय पर भी विस्तृत प्रस्तुति दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि यह ग्राम/वन पंचायत स्तर पर तैयार की जाने वाली एक आधारभूत कार्ययोजना होती है, जिसके माध्यम से वन संरक्षण, चारागाह प्रबंधन, वनाग्नि रोकथाम, प्राकृतिक संसाधन उपयोग और

 

आजीविका संवर्द्धन के वार्षिक लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं। वन क्षेत्राधिकारी बृज मोहन टम्टा ने कहा कि चम्पावत क्षेत्र में वनाग्नि, अवैध कटान और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए वन पंचायतों की सक्रिय भूमिका बेहद जरूरी है। उन्होंने पंचायतों से आग सीजन से पहले अपनी वनाग्नि रोकथाम रणनीति तैयार करने की अपील की।

 

विभागीय अधिकारियों ने प्रशिक्षणार्थियों से वन सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण, अवैध कटान की सूचना देने और संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने का अनुरोध किया। अभिलाषा समिति पिथौरागढ़ के निदेशक डॉ. किशोर कुमार पंत ने वन पंचायतों को ग्रामीण आजीविका, जल स्रोत संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा का आधार बताते हुए सामुदायिक सहभागिता को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

 

कार्यक्रम का समापन वन पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा अपने क्षेत्रों में वन संरक्षण और आग रोकथाम में सक्रिय योगदान देने के संकल्प के साथ हुआ। कार्यक्रम में वन क्षेत्राधिकारी बृज मोहन टम्टा, डॉ.किशोर कुमार पंत, राजेन्द्र पाण्डेय, जगदीश सिंह, नंदन गिरी, बलवन्त भण्डारी, सूरज प्रसाद, हरीश तिवारी, सुन्दर सिंह सहित कई वन अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

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