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पिथौरागढ़ : शूर्पणखा नासिका छेदन और सीता हरण का भव्य मंचन

खचाखच भरा सदर रामलीला मैदान

श्री रामलीला प्रबंधकारिणी समिति सदर द्वारा, आयोजित ऐतिहासिक 130वें रामलीला मंचन के छठे दिन रामलीला मैदान दर्शकों से खचाखच भरा रहा। भरत मिलाप, शूर्पणखा नासिका छेदन, खर-दूषण वध और सीता हरण के प्रसंगों के भावपूर्ण मंचन ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।

 

रामलीला की शुरुआत भरत मिलाप के प्रसंग से हुई। इस दौरान भगवान श्रीराम और भरत के बीच भ्रातृप्रेम, त्याग और मर्यादा का भावपूर्ण दृश्य प्रस्तुत किया गया। इसके बाद पंचवटी में शूर्पणखा श्रीराम के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखती है। श्रीराम के इनकार करने पर वह लक्ष्मण को विवाह का प्रस्ताव देती है।

 

लक्ष्मण के इनकार के बाद शूर्पणखा माता सीता को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करती है। माता सीता की रक्षा के लिए लक्ष्मण उसकी नासिका छेदन करते हैं। इस प्रसंग का मंचन दर्शकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

 

अपमानित शूर्पणखा अपने भाइयों खर और दूषण के पास पहुंचकर उन्हें पूरी घटना बताती है। इसके बाद श्रीराम खर-दूषण का वध कर देते हैं। भाइयों की मृत्यु और बहन के अपमान से क्रोधित रावण सीता हरण की योजना बनाता है। वह मारीच की सहायता से स्वर्ण मृग का मायाजाल रचता है।

 

स्वर्ण मृग के पीछे श्रीराम के जाने और लक्ष्मण के भी कुटिया से दूर होने के बाद रावण साधु का वेश धारण कर पंचवटी पहुंचता है और माता सीता का हरण कर लेता है। इन प्रसंगों के सजीव मंचन ने दर्शकों को कथा से भावनात्मक रूप से जोड़े रखा। सीता हरण के साथ रामलीला की कथा ने एक नया मोड़ लिया, जिससे आगामी दिनों में होने वाले मंचन को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है।

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