पिथौरागढ़ : डीएनए जांच से पॉक्सो प्रकरण में हुआ नया खुलासा, किशोर निकला मृत नवजात का जैविक पिता
वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने की अग्रिम विवेचना, विधि-विवादित किशोर को किशोर न्याय बोर्ड में किया पेश

अस्कोट कोतवाली में दर्ज पॉक्सो प्रकरण की अग्रिम विवेचना में डीएनए परीक्षण से नया तथ्य सामने आया है। जांच में एक विधि-विवादित किशोर को पीड़िता द्वारा जन्म दिए गए मृत नवजात शिशु का जैविक पिता पाया गया। पुलिस ने तीन नवंबर को किशोर को संरक्षण में लेकर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की और किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया।
बोर्ड के आदेश पर उसे राजकीय बाल संप्रेक्षण गृह, अल्मोड़ा भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार, कोतवाली अस्कोट में योगेश कुमार पांडे के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 65(1) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5/6 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में 24 जुलाई 2026 को आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया जा चुका था।
विवेचना के दौरान पीड़िता द्वारा जन्म दिए गए मृत नवजात शिशु के जैविक नमूने डीएनए परीक्षण के लिए क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (आरएफएसएल), रुद्रपुर भेजे गए थे। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद प्राप्त रिपोर्ट में नामजद अभियुक्त योगेश कुमार पांडे का मृत नवजात का जैविक पिता होना प्रमाणित नहीं हुआ।
इसके बाद पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर मामले में अग्रिम विवेचना की। जांच के दौरान सामने आए दो संदिग्ध व्यक्तियों के रक्त नमूने विधिक प्रक्रिया के तहत प्राप्त कर 12 अक्टूबर 2026 को डीएनए परीक्षण के लिए आरएफएसएल रुद्रपुर भेजे गए। प्रयोगशाला से प्राप्त रिपोर्ट में एक विधि-विवादित किशोर का मृत नवजात शिशु का जैविक पिता होना प्रमाणित हुआ।
वैज्ञानिक और अन्य विवेचनात्मक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने तीन नवंबर 2026 को किशोर को संरक्षण में लेकर नियमानुसार कार्रवाई की। इसके बाद उसे किशोर न्याय बोर्ड, पिथौरागढ़ के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे राजकीय बाल संप्रेक्षण गृह, अल्मोड़ा में दाखिल कराया गया। पुलिस के अनुसार प्रकरण में वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष एवं तथ्यपरक विवेचनात्मक कार्रवाई की गई है।
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