पिथौरागढ़ : छह साल बाद तिब्बती उत्पादों की दुकानें सजने की उम्मीद, इस बार अधिक व्यापारियों के पहुंचने की संभावना
काली और गोरी नदियों के संगम पर 14 नवंबर से आयोजित होने वाले जौलजीबी मेले की तैयारियां तेज

काली और गोरी नदियों के संगम पर 14 नवंबर से आयोजित होने वाले ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय जौलजीबी मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस वर्ष मेले में छह साल बाद तिब्बती उत्पादों की दुकानें सजने की उम्मीद है। साथ ही पिछले वर्ष की तुलना में अधिक व्यापारियों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
जिलाधिकारी आशीष भटगांई के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने मेला स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने मेला समिति के पदाधिकारियों और विभिन्न हितधारकों के साथ बैठक कर आयोजन की तैयारियों, व्यापारिक गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आगंतुकों की सुविधाओं पर चर्चा की।
अपर जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी धारचूला एवं मेलाधिकारी आशीष जोशी से तैयारियों की जानकारी लेते हुए पेयजल, बिजली, शौचालय और स्वच्छता सहित सभी मूलभूत व्यवस्थाएं 11 नवंबर तक पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने व्यापारियों, स्थानीय नागरिकों और देश-विदेश से आने वाले आगंतुकों की सुविधा एवं सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने को कहा।
बैठक में मिले सुझावों के आधार पर मेले की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर भी चर्चा हुई। इसके तहत स्वयंसेवकों की टीम गठित करने, दर्शक दीर्घा को व्यवस्थित करने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं। उल्लेखनीय है कि जौलजीबी मेला सीमांत क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। भारत, नेपाल और तिब्बत के साथ पारंपरिक व्यापारिक एवं सांस्कृतिक संबंधों की विरासत को दर्शाने वाला यह मेला हर वर्ष बड़ी संख्या में व्यापारियों और आगंतुकों को आकर्षित करता है।
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