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पिथौरागढ़ : दोषियों को कठोर कारावास की सजा

एससी, एसटी एक्ट के तहत विशेष सत्र न्यायालय ने किया दोषसिद्ध, बीस हजार रुपए का जुर्माना

पिथौरागढ़ विशेष सत्र न्यायालय ने दो लोगो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दोष सिद्ध करते हुए तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा व जुर्माने से दंडित किया है।

 

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अभियोजन पक्ष के मुताबिक बीते 2019 में ग्राम सेरीकांडा के तत्कालीन ग्राम प्रधान विरेंद्र कुमार ने पुलिस को तहरीर देते हुए बताया कि वह अनुसूचित जाति का व्यक्ति है। 26 जून 2019 की सायं वह अपनी अल्टो कार से पिथौरागढ़ से अपने घर लौट रहा था। धमौड़ के निकट मोटर साइकिल में सवार हरीश सिंह व पंकज तिवारी ने उसे हाथ दिया पर वह रुका नहीं सीधा चलता रहा।

 

इस दौरान हरीश सिंह ओर पंकज तिवारी ने उसे ओवरटेक करते हुए अपना वाहन उसके वाहन के आगे खड़ा कर दिया। हरीश सिंह से पूछने पर वह उसे जातिसूचक शब्दों प्रयोग करते हुए गाली देने लगा और मारपीट करने लगा। दोनों आरोपियों ने उसे लात, घूंसे और लाठी डंडों से मारा पीटा। एक मोटर साइकिल वाले के आने पर मौका मिलने पर वहां से भाग कर ऐंचोली पुलिस चौकी पहुंचा।

 

तहरीर के आधार पर पुलिस द्वारा दोनों आरोपितों हरीश सिंह और पंकज तिवारी के विरुद्ध एससी, एसटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। मामले की सुनवाई विशेष सत्र न्यायालय में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पंत और एडीजीसी राकेश चंद ने पैरवी की।

 

सभी पक्षों को सुनने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने हरीश सिंह और पंकज तिवारी को दोषसिद्ध करते हुए प्रत्येक को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1) (आर) के अपराध के लिए तीन वर्ष के कठोर कारावास ओर 20 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया। जुर्माना जमा नहीं करने पर दोषियों को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

 

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