पिथौरागढ़ : ‘गुलदार कू दगड़िया’ जागरूकता अभियान के सकारात्मक संकेत
मानव- वन्यजीव संघर्ष में आई कमी, पिथौरागढ़ वन विभाग का अभियान जारी

कभी मानव-वन्यजीव संघर्ष के लिए संवेदनशील माने जाने वाले सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में अब हालात कुछ बदलते नजर आ रहे हैं। वन विभाग की रणनीतिक पहल, जनजागरूकता अभियानों और त्वरित कार्रवाई प्रणाली के चलते गुलदार (तेंदुआ) से जुड़े हादसों में कमी दर्ज की गई है, जो एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तराखंड में वर्तमान में 2,275 से अधिक गुलदार मौजूद हैं, जबकि उपलब्ध वन क्षेत्र के अनुसार इनकी संतुलित संख्या लगभग 500 के आसपास मानी जाती है। एक गुलदार का होम रेंज लगभग 30 से 50 वर्ग किलोमीटर होता है, ऐसे में सीमित 24,686 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या का समायोजन संभव नहीं है।
यही कारण है कि बड़ी संख्या में गुलदार भोजन और क्षेत्र की तलाश में गांवों, कस्बों, कृषि भूमि और झाड़ीदार इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ती हैं। पिथौरागढ़ में वन विभाग की टीम द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार वन क्षेत्राधिकारी दिनेश जोशी ने बताया कि वर्ष 2022-23 से पहले के एक दशक में हर साल औसतन एक व्यक्ति की मौत गुलदार के हमलों में होती थी, जबकि कई लोग घायल होते थे।
रेंजर जोशी ने बताया कि 2023 के बाद गुलदार के हमलों में किसी व्यक्ति की मौत नहीं हुई, जबकि हमलों में 28 लोग घायल हुए। तीन साल पूर्व के चिंताजनक आंकड़ों को देखते हुए वन विभाग ने ‘गुलदार कू दगड़िया’ नाम से व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया। इस अभियान के तहत विभागीय टीमें गांव-गांव जाकर ढोल बजाकर लोगों को सतर्क करती रहीं।
इसके साथ ही नुक्कड़ नाटक, गोष्ठियां और स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों और ग्रामीणों को जागरूक किया गया। विभागीय वाहनों के माध्यम से मुनादी कर लोगों को वन्यजीवों से बचाव के उपाय बताए गए, जिससे आमजन में सतर्कता और समझ बढ़ी। साथ ही प्रभागीय वनाधिकारी के निर्देश पर वन क्षेत्राधिकारी पिथौरागढ़ के नेतृत्व में एक विशेष क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) का गठन किया गया।
इस टीम में अनुभवी वन कर्मियों के साथ स्थानीय भूगोल से परिचित आउटसोर्स कर्मियों और ऊर्जावान वन आरक्षियों को शामिल किया गया। टीम को विशेष प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें कठिन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई, स्वयं की सुरक्षा, वन्यजीवों को सुरक्षित बेहोश कर रेस्क्यू करना और कम समय में मौके पर पहुंचना शामिल है, हालांकि गुलदार अब भी आबादी के आसपास देखे जा रहे हैं।
साथ ही क्यूआरटी टीम द्वारा दर्जनों वन्यजीवों का सफल रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है। इधर प्रभागीय वनाधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि गुलदार कू दगड़िया अभियान की शुरूआत के बाद मानव- वन्यजीव संघर्ष काफी हद तक कम हो गया है। अभियान को आगे भी जारी रखा जायेगा।
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