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पिथौरागढ़ : 66 साल का हुआ सीमांत जनपद

उपलब्धियों के साथ चुनौतियां बरकरार

पिथौरागढ़ ने मंगलवार को अपना 66वां स्थापना दिवस मनाया। 24 फरवरी 1960 को चीन सीमा से लगे दुर्गम क्षेत्रों के विकास और रणनीतिक दृष्टि से पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी जिलों का गठन किया गया था। अल्मोड़ा से अलग होकर बने पिथौरागढ़ में बाद में सेना ब्रिगेड मुख्यालय स्थापित हुआ और प्रशासनिक ढांचा मजबूत हुआ।

साढ़े छह दशक के सफर में जिले ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। नैनी-सैनी हवाई पट्टी से हवाई सेवा शुरू हुई, ऑलवेदर सड़क और चीन सीमा तक सड़क पहुंची। वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आदि कैलास यात्रा से पर्यटन को नई पहचान मिली। पिथौरागढ़ को नगर निगम का दर्जा मिला और मुनस्यारी नगर पंचायत बनी।

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हालांकि स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली, पानी और रोजगार जैसे बुनियादी क्षेत्रों में अब भी सुधार की जरूरत है। कई गांव आज भी सड़क और बिजली से वंचित हैं। बेस अस्पताल और मेडिकल कॉलेज जैसी बड़ी परियोजनाएं पूरी तरह संचालित नहीं हो सकी हैं। पलायन, आपदा और सीमांत क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियां अब भी विकास में बाधा बनी हुई हैं।

क्षेत्रफल (7090 वर्ग किमी) की दृष्टि से पिथौरागढ़ कुमाऊं का सबसे बड़ा और प्रदेश का तीसरा बड़ा जिला है। जिले की जनसंख्या 4.83 लाख से अधिक है और साक्षरता दर 82.25 प्रतिशत है। 66 वर्षों के इस सफर में उपलब्धियों के साथ-साथ चुनौतियां भी कायम हैं। स्थापना दिवस पर जिले के सर्वांगीण विकास और बेहतर बुनियादी सुविधाओं के लिए नए संकल्प लिए गए।

जनपद गठन – 24 फरवरी 1960, जनसंख्या- 483439, क्षेत्रफल- 7090, साक्षरता- 82.25 प्रतिशत, विकासखंड- 08, तहसील- 12, उपतहसील- 01, गांव- 1657, विधानसभा- 04, नगर निकाय- 06, पुलिस थाने- 16

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