पिथौरागढ़ : वीर सैनिकों, शहीदों और पूर्व सैनिकों को सम्मान देने के लिए स्वयं के संसाधनों से तैयार किया सम्मान स्थल
पूर्व सैनिक संगठन ने किया आपरेशन सम्मान का शुभारंभ

सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के वीर सैनिकों, शहीदों और पूर्व सैनिकों की उपेक्षा से नाराज पूर्व सैनिक संगठन ने आपरेशन सम्मान का शुभारंभ किया है। वीर सैनिकों, शहीदों और पूर्व सैनिकों को सम्मान देने के लिए अपने प्रयासों से संगठन ने सम्मान स्थल तैयार किया है ।

संगठन के उपाध्यक्ष मयूख भट्ट ने बताया कि यह पहला और एकमात्र उपक्रम है जो स्वयं पूर्व सैनिकों ने तैयार किया है और शीघ्र ही सम्मान स्थल का भव्य उद्घाटन किया जायेगा। उन्होंने बताया कि पूर्व सैनिक संगठन बीते लंबे समय से शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गौरव को संरक्षित करने की गुहार लगाई जा रही थी लेकिन किसी ने भी सुध नहीं ली। चुनाव में राजनेताओं ने पूर्व सैनिकों को चुनावी मोहरा बनाया। चुनाव के दौरान सैनिकों के नाम पर सम्मान यात्राएं और बलिदानी यात्राएं निकाली गई।
दूसरी तरफ जिला मुख्यालय में पूर्व सैनिकों के बैठने के लिए सत्त्ता में रहे किसी भी दल ने एक स्थल तक बना कर नहीं दिया। एक सैनिक विश्राम गृह तक नही बनाया गया। वीरों, शहीदों के चित्रों और इतिहास को एक बरामदे में सीमित कर दिया। इसी उपेक्षा से क्षुब्ध होकर स्वयं ही सम्मान को कायम रखने एक नवीन तरीका अपनाया गया है। आपरेशन सद्भावना के रूप में पूर्ण किया जा रहा है।
पूर्व सैनिकों के आपसी सहयोग, समन्वय से नगर के बिण में मां भगवती सदन में पूर्व सैनिक संगठन कार्यालय लगभग तैयार कर दिया है। इस भवन में वीरता और पुरस्कारों से संबंधित एतिहासिक चीजों को संरक्षित किया जाएगा। पूर्व सैनिक संगठन के उपाध्यक्ष मयूख भट्ट ने बताया कि यह अपनी तरह का पहला और एकमात्र उपक्रम है जो पूर्व सैनिकों द्वारा तैयार किया गया है।
सैनिक सम्मान स्थल पर दूर दराज गांवों से आने वाले पूर्व सैनिक रात्रि विश्राम भी कर सकेंगे। भवन में वीरता फोटो गैलरी भी बनाई जा रही है। संगठन ने जिले के सभी गांव वालों से अपील की हे उनके गांव का कोई वीर और शहीद रहा है तो उसकी फोटो सहित पूरी जानकारी संगठन को उपलब्ध कराई जाए। संगठन समय-समय पर स्कूली बच्चों को इस स्थल का भ्रमण भी कराएगी ताकि बच्चे जनपद के सेना में दिए गए सहयोग से भिज्ञ हों और देश सेवा के लिए प्रेरित हों।
साथ ही युवाओं को सेना में जाने के लिए प्रेरित करने हेतु इस हाल पर सुविधाओं के साथ सेना के अधिकारियों द्वारा भी युवाओं को मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। संगठन ने कहा है कि शासन, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और सरकारों से वीरों और शहीदों के गांव में उनके नाम के द्वार और स्मृति स्थल बनाने की मांग भी अनसुनी की गई, जबकि जिले के प्रत्येक गांव, कस्बे में हर दूसरा व्यक्ति सेना से संबंध रखता है। पिथौरागढ़ की सैन्य पृष्ठभूमि सदियों से गौरवमयी रही है।
पिथौरागढ़ जिले की सैन्य पृष्ठभूमि सदियों से गौरवमयी रही है। चंपावत जिले के गठन से पूर्व पिथौरागढ़ जिला देश का सबसे अधिक सैनिक घनत्व वाला जिला था। जिले के तीन सौ से अधिक सैनिक देश की रक्षा के लिए शहीद हुए हैं तो 300 से अधिक वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिक जनपद के लिए गर्व हैं।
पूर्व सैनिक संगठन द्वारा सम्मान स्थल को जनपद के हर व्यक्ति के लिए भी सम्मान होने की बात को कहा गया है, क्योंकि हर व्यक्ति, हर गांव एक सैनिक से अवश्य जुड़ा है और ऐसे वीर शहीदों के इतिहास को यहां पर सम्मान के साथ संरक्षित किया जा रहा है जिनको कोई भी व्यक्ति यहां पर आकर देख पाएगा, जान पाएगा और ऐसे वीरों को यहां देखकर आत्मसात और अपनापन अवश्य महसूस कर पाएगा।
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