पिथौरागढ़ : साहित्यकारों का संगम, साझा संस्कृति और साहित्य पर हुआ सार्थक संवाद
अंतरराष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन, काव्य गोष्ठी और सम्मान समारोह

भारत और नेपाल के साहित्यकारों का अनोखा संगम ज्ञान प्रकाश संस्कृत पुस्तकालय समिति के तत्वावधान में नगर निगम सभागार में आयोजित कार्यक्रम में देखने को मिला। तृतीय भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन, काव्य गोष्ठी और सम्मान समारोह में दोनों देशों के कवियों ने साझा संस्कृति, इतिहास और साहित्य पर चर्चा करते हुए काव्य पाठ से समां बाँध दिया।

सम्मेलन में साहित्यकारों को भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय मैत्री सम्मान से सम्मानित भी किया गया। ज्ञान प्रकाश संस्कृत पुस्तकालय समिति के तत्वावधान में नगर निगम सभागार में तृतीय भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन, काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान भारत और नेपाल के दो दर्जन से अधिक साहित्यकारों एवं कवियों ने भाग लेकर साझा संस्कृति, इतिहास और साहित्य पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान दोनों देशों के साहित्यकारों को भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय मैत्री सम्मान से सम्मानित किया गया। इससे पूर्व नेपाल के वरिष्ठ साहित्यकार डा. देवेंद्र प्रसाद भट्ट की अध्यक्षता में बतौर मुख्य अतिथि मेयर कल्पना देवलाल, महामंडलेश्वर हेमंतानंद पशुपति महाराज, मंजुला अवस्थी और कार्यक्रम संयोजक डा. पीतांबर अवस्थी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
ओम् सुर ताल कला केंद्र के संस्थापक आचार्य अंकित पांडेय एवं उनके विद्यार्थियों ने पारंपरिक शगुनाखर और स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि मेयर देवलाल ने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के आयोजनों से भारत और नेपाल के मध्य सदियों से चले आ रहे रोटी-बेटी के संबंधों को और मजबूती मिलती है।
कार्यक्रम संयोजक डा. पीतांबर अवस्थी ने बताया कि इस सम्मेलन की शुरुआत वर्ष 2023 में पिथौरागढ़ से हुई थी, जबकि दूसरा संस्करण 2024 में नेपाल में आयोजित किया गया। तीसरा सम्मेलन पुनः पिथौरागढ़ में आयोजित किया गया है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के साहित्यकारों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इस पहल से भारत और नेपाल की साझा संस्कृति, साहित्य और विचारों का आदान-प्रदान होगा तथा भविष्य में इसे और भव्य रूप दिया जाएगा।
साहित्यिक सत्र में वरिष्ठ पत्रकार दिनेश पंत, किरण आचार्य, डा. देवेंद्र भट्ट, डा. आनंदी जोशी व दिनेश भट्ट ने अपने विचार रखे। इस दौरान मंजू गिरि ने नेपाल का प्रसिद्ध लोकगायन देवड़ा प्रस्तुत किया, वहीं नेपाल के गायक तिलक राम पेला ने ग़ज़ल गायन से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। काव्य गोष्ठी में भारत से डा. आनंदी जोशी, लक्ष्मी आर्या, आशा सौन, नीरज जोशी, अनीता जोशी, मथुरा दत्त चौंसाली, अनीता अनु जोशी, उमा पाटनी अवनि, काजल नेगी, रेखा पांडेय और रचना शर्मा ने काव्य पाठ किया।
नेपाल से गंगा बिष्ट, कृष्ण सिंह पेला, तीर्थराज पांडे, गणेश नेपाली, किरण आचार्य, कल्पना खरेल, डा. देवेंद्र प्रसाद भट्ट और हेमंत विवश ने अपनी रचनाओं से कार्यक्रम में रंग भरे। समापन सत्र में साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। पुरुष वर्ग में पं. जयदेव अवस्थी (ज्योतिषाचार्य) तथा महिला वर्ग में हरूली आमा स्मृति सम्मान प्रदान किया गया।
इस अवसर पर एमसी जोशी, महेश बराल, दयानंद भट्ट, ललित धानिक, गीता जोशी, ज्योत्स्ना जोशी, सौरभ जोशी, रजनी जोशी, वशिष्ठ जोशी, जया लोहनी, हेमा देवी, निहारिका अवस्थी, हर्षवर्धन अवस्थी, अजय अवस्थी सहित कई साहित्य प्रेमी उपस्थित थे। समापन अवसर पर संयोजक डा.पीतांबर अवस्थी और मंजुला अवस्थी ने सभी अतिथियों व उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।
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