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पिथौरागढ़ : धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर जिलाधिकारी ने दिया जोर

ध्वज खंडेनाथ मंदिर पहुंचे डीएम, अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश

सीमांत जनपद के ऐतिहासिक एवं आस्था के प्रमुख केंद्र ध्वज खंडेनाथ मंदिर में आज जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की और जनपदवासियों की सुख.समृद्धि, शांति एवं प्रगति की कामना की। पूजा-अर्चना उपरांत जिलाधिकारी ने मंदिर परिसर का तथा वहां उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया।

 

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उन्होंने मंदिर समिति के पदाधिकारियों एवं पुजारी से व्यवस्थाओं, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, पेयजल, स्वच्छता, मार्ग सुधार एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। मंदिर समिति के पदाधिकारियों द्वारा जिलाधिकारी से अनुरोध किया गया कि ध्वज खंडेनाथ मंदिर को मानसखंड माला के अंतर्गत सम्मिलित किया जाए,

 

जिससे मंदिर का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार हो सके तथा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिले। इस संबंध में जिलाधिकारी ने सकारात्मक आश्वासन देते हुए कहा कि शासन स्तर पर आवश्यक पत्राचार किया जाएगा तथा प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

 

जिलाधिकारी ने श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए मंदिर परिसर में पेयजल टैंक निर्माण, कीर्तन हॉल के निर्माण, शौचालय व्यवस्था सुदृढ़ करने तथा अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास हेतु प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश ग्रामीण निर्माण विभाग को दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रस्ताव शीघ्र तैयार कर स्वीकृति हेतु प्रस्तुत किए जाएं,

 

जिससे कार्य समयबद्ध ढंग से प्रारंभ किए जा सकें। इस दौरान उन्होंने कहा कि जनपद के प्रमुख धार्मिक स्थलों का समुचित विकास प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। धार्मिक पर्यटन के विकास से न केवल क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान सुदृढ़ होगी, बल्कि स्थानीय लोगों को स्वरोजगार एवं आर्थिक सशक्तिकरण के अवसर भी प्राप्त होंगे।

 

इस दौरान तहसीलदार विजय गोस्वामी, अधिशासी अभियंता ग्रामीण निर्माण विभाग पंकज कुमार, मंदिर समिति के पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। बता दें कि ध्वज खंडेनाथ मंदिर जनपद की आस्था का प्रमुख केंद्र होने के साथ-साथ धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। ऊँचाई पर स्थित यह मंदिर क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का प्रतीक है, जहाँ प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं पर्यटक दर्शन हेतु पहुँचते हैं।

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