पिथौरागढ़ : पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर हुआ मंथन
मानस कॉलेज में राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन

पिथौरागढ़ के मानस कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ‘पारंपरिक ज्ञान का विकास, पारंपरिक ज्ञान एवं आधुनिक विज्ञान व प्रौद्योगिकी के मध्य समन्वय’ का समापन हो गया। कार्यशाला के दूसरे दिन विभिन्न विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

द्वितीय सत्र में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग पूर्व वैज्ञानिक डॉ. डीके पांडे ने आधुनिक तकनीक और वैदिक वैज्ञानिक ज्ञान के समान बिंदुओं को रेखांकित करते हुए उनके समन्वय पर बल दिया। वहीं यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि अब केवल चर्चा का नहीं, बल्कि स्वयं पहल कर पारंपरिक ज्ञान को अपनाने का समय है।
प्रख्यात शिक्षाविद प्रो. केके पांडे ने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने के लिए हमें अपनी जड़ों से जुड़ते हुए आधुनिक तकनीक के साथ संतुलन बनाना होगा। क्वाड्रा अस्पताल रुड़की के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जितेंद्र पांडे ने आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा की परंपरा को आधुनिक सर्जरी की नींव बताते हुए विस्तार से जानकारी दी।
वहीं देहरादून की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. दीप्ति पांडे ने पंचकर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आयुर्वेद को अपनाने का आह्वान किया। हिमालयन ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष राजेंद्र विष्ट ने जल संरक्षण, संचयन और प्रबंधन के लिए पारंपरिक विधियों को अपनाने पर जोर दिया। कार्यशाला के दूसरे दिन की शुरुआत योग सत्र से हुई, जिसका संचालन योगाचार्य हेमचंद्र भट्ट और केशव दत्त भट्ट ने किया।
उन्होंने योग को वैज्ञानिक और प्राकृतिक जीवनशैली का आधार बताया। पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हेमंत पांडे ने हिमालयी औषधीय वनस्पतियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वैश्विक स्तर पर इन पर आधारित औषधियों की मांग बढ़ रही है। प्रो. पीसी पांडे ने पारंपरिक ज्ञान के भविष्य और उसकी उपयोगिता पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजीत गैरोला ने संतुलित जीवनशैली, उचित आहार, व्यायाम और तनावमुक्त जीवन अपनाने पर बल दिया। वहीं दून अस्पताल की वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ डॉ. रिचा कुकरेती ने पोषणयुक्त भोजन के महत्व और पारंपरिक खाद्य पदार्थों की उपयोगिता पर जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान शिवाश्रम के विजय जोशी ने त्रैविद्या और पंचकर्म पद्धति पर प्रकाश डाला,
जबकि पूर्व शिक्षा उपनिदेशक कमला पंत ने लोक विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं पर विस्तार से विचार रखे। समापन अवसर पर मानस अकादमी के विद्यार्थियों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। कॉलेज के निदेशक देवाशीष पंत ने कार्यशाला की समीक्षा करते हुए इसे अपने उद्देश्यों में सफल बताया और सीमांत क्षेत्र में नवाचार एवं रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई।
इस मौके पर मानस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के अध्यक्ष डॉ. अशोक पंत सहित अन्य अतिथियों ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। कार्यशाला के दौरान पीसीएम क्राफ्ट्स द्वारा तैयार पारम्परिक सामग्रियों, कविता द्वारा तैयार अल्पनाओं, भाव राग ताल अकादमी द्वारा लोक संस्कृति तथा शिवानी की पेंटिंग गैलरी आकर्षण का केन्द्र रहे।
कार्यक्रम का संचालन योगेश भट्ट, हेम पंत, प्रियंका शर्मा, डा. उत्तरा जंगबहादुर, हिमांशु पुनेठा द्वारा किया गया तथा समन्वयन अंशुल पंत, यशोदा पाठक, संदीप मसीह, पवन कापड़ी, प्रकाश कुमार, मीनाक्षी पंत, आकांक्षा पंत द्वारा किया गया। कार्यशाला के आयोजन में नेहा जोशी, रेखा ओझा, दीपा सामन्त, पूजा कापड़ी, गिरीश, पूजा, कमल कुमार, सुमन विष्ट, देवराज वल्दिया, हेम पाण्डे, अतुल माथुर, विवेक पंत, दिनेश भट्ट, दीपांशु पाटनी, नरेन्द्रसिंह सहित समस्त कॉलेज स्टॉफ का विशेष योगदान रहा । कार्यशाला का समापन गिर्दा के गीत ‘जैता एक दिनत आलो’ से किया गया।
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