पिथौरागढ़ : हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्यिक परिचर्चा
वक्ताओं में हिंदी भाषा के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर डाला प्रकाश

पिथौरागढ़ के मुनस्यारी पीजी कॉलेज में ‘हिंदी दिवस’ की पूर्व संध्या पर सांस्कृतिक दिवस आयोजन प्रकोष्ठ एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘नई शिक्षा नीति’, ‘हिंदी भाषा एवं आंचलिक बोलियां’ विषय पर साहित्यिक परिचर्चा का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभारी प्राचार्य डॉ. दुर्गेश कुमार शुक्ला, कार्यक्रम संयोजक डॉ. प्रशांत जोशी एवं मुख्य वक्ता डॉ. रीतू ने संयुक्त रूप से किया। प्राचार्य डॉ. शुक्ला ने छात्र-छात्राओं को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए हिंदी भाषा के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर प्रकाश डाला। संयोजक डॉ. जोशी ने आंचलिक बोलियों के संरक्षण व सम्मान पर बल देते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों को रेखांकित किया।
मुख्य वक्ता डॉ. रीतू ने हिंदी भाषा एवं हिंदी दिवस के इतिहास और महत्व पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं डॉ. अमित कुमार टम्टा और डॉ. उदयभान ने प्रतियोगी परीक्षाओं में हिंदी की उपयोगिता पर छात्रों का मार्गदर्शन किया। डॉ. निधि ने लेखक ओमप्रकाश वाल्मीकि की रचना ‘जूठन’ के सामाजिक संदेश को छात्रों तक पहुँचाया। छात्र चंदन ने संविधान में हिंदी की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन डॉण् चेतन चंद्र जोशी ने किया। उन्होंने इस अवसर पर रामधारी सिंह दिनकर की कृति ‘रश्मिरथी’ का पाठ भी किया।
इस अवसर पर डॉ. राहुल पांडेय, डॉ. चंद्र प्रकाश आर्या, डॉ. पुष्पा कालाकोटी, डॉ. राजेंद्र सिंह राणा, डॉ. दिनेश चंद्र पांडेय, शोध छात्र रजनीश, गणेश फर्सवान, कृष्णा पंचपाल, हेमा पंचपाल, धर्मेंद्र नितवाल, लक्ष्मण सिंह बिष्ट, लक्ष्मी, त्रिलोकराम सहित कई लोग मौजूद थे।
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