पिथौरागढ़ : राष्ट्रीय कार्यशाला: पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर जोर
मानस कॉलेज के प्रयासों की सराहना, विद्यार्थियों ने दी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति

पिथौरागढ़ के मानस कॉलेज में यूकॉस्ट, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय एवं पहल संस्था के संयुक्त तत्वावधान में ‘पारंपरिक ज्ञान का विकास, पारंपरिक ज्ञान एवं आधुनिक विज्ञान व प्रौद्योगिकी के मध्य समन्वय’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ आज एसएसजे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट द्वारा किया गया।

इस दौरान उन्होंने कहा कि आधुनिक प्रौद्योगिकी ने जहां जीवन को सरल बनाया है, वहीं भागदौड़ और तनावपूर्ण जीवनशैली ने इसे जटिल भी बना दिया है। कहा कि सदियों से चला आ रहा पारंपरिक ज्ञान वैज्ञानिक आधार पर आधारित है और इसे अपनाकर जीवन को सहज बनाया जा सकता है।
प्रो. बिष्ट ने मानस कॉलेज के प्रयासों की सराहना करते पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं को व्यावसायिक शिक्षा देकर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने को सराहनीय बताया। अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. एनएस भंडारी ने कार्यशाला को एक अभिनव पहल बताते हुए स्वदेशी ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर बल दिया।
कार्यशाला के संयोजक डॉ. डीएस बिष्ट ने बताया कि दो दिनों तक देश के प्रख्यात वैज्ञानिक और विशेषज्ञ पारंपरिक ज्ञान से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे। इससे पूर्व मानस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार पंत ने अतिथियों का स्वागत किया। महाविद्यालय के निदेशक देवाशीष पंत ने विषय पर आधार वक्तव्य प्रस्तुत किया,
वहीं आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सुनील जोशी ने मर्म चिकित्सा पर विस्तृत जानकारी दी, जिसका व्यावहारिक प्रदर्शन जगदीश कलौनी द्वारा किया गया। इस मौके पर महाविद्यालय और अकादमी के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। संस्था की संरक्षिका कमला पंत ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यशाला में विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन योगेश भट्ट द्वारा किया गया।
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