पिथौरागढ़ : हिमालय की संजीवनी सीबकथोर्न से बदलेगी उच्च शिखरीय गांवों की तस्वीर
धारचूला विकासखंड के उच्च शिखरीय वन पंचायतों में लगेगा उच्च किस्म का वन चूक

सीमांत जनपद के धारचूला विकासखंड के उच्च शिखरीय वन पंचायतों में वन विभाग के सहयोग से उच्च गुणवत्ता वाले सीबकथोर्न (वन चूक) के पौधे रोपे जाएंगे। इसके लिए हिमाचल प्रदेश से 5000 सीबकथोर्न के पौधे मंगाए गए हैं, जिन्हें विभिन्न वन पंचायतों में रोपित किया जाएगा।

यह जानकारी देते हुए प्रभागीय वनाधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि सीबकथोर्न को ‘हिमालयी संजीवनी’ कहा जाता है। इसका पल्प, बीज, तेल और पत्तियां औषधीय गुणों से भरपूर हैं और यह कैंसर, मधुमेह और रक्तचाप जैसी बीमारियों के उपचार में उपयोगी है। बताया कि राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड, भारत सरकार की परियोजना के तहत इस पौधे का वृहद स्तर पर उत्पादन और विपणन सुनिश्चित किया जा रहा है।
परियोजना से न केवल किसानों को आय का साधन मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। जिसमें फलो का आकार बड़ा व उत्पादन जंगली किस्न के सापेक्ष बहुत अधिक होता है। इस परियोजना के माध्यम से सीबकथोर्न के उद्योगों को उच्च स्तरीय कच्चा माल प्राप्त होगा तथा कृषकों को रोजगार प्राप्त होगा एवं साथ-साथ स्थानीय पर्यावरण को संरक्षित किया जायेगा क्योंकि इसका वृक्ष अनुपयोगी व बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने में सहायक है।
21 से 27 अप्रैल तक धारचूला के 14 कृषकों और वन विभाग के कर्मचारियों को हिमाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में सीबकथोर्न के संरक्षण, कृषिकरण और विपणन पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान, मौहाल कुल्लू में प्रभारी इंजीनियर आरके सिंह और वैज्ञानिक सरला ने उत्तराखंड के कृषकों को इस औषधीय पौधे की उपयोगिता और आजीविका संवर्धन में इसके महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय की शाखा कुकुमसेरी में पौधशाला स्थापना, केसी संस्था के तहत पौधारोपण का प्रदर्शन, मां हिडिम्बा स्वयं सहायता समूह द्वारा मूल्यवर्धन उपकरणों की जानकारी और प्रगतिशील कृषक अमर सिंह ठाकुर के बाग का भ्रमण भी कराया गया। इस अवसर पर प्रशिक्षुओं को सीबकथोर्न की ‘डिल्बू’ (उच्च किस्म) की 5000 पौध भी प्रदान भी किए गए, जिन्हें धारचूला के ऊंचाई वाले इलाकों में लगाया जाएगा। वैज्ञानिक डॉ. विजय प्रसाद भट्ट की अगुवाई में वन अधिकारी सुरेश नपच्याल, विक्रम धामी और सागर मेहरा सहित स्थानीय सरपंच भी प्रशिक्षण में प्रतिभाग किया।
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