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पिथौरागढ़ : तीन युद्धों के जांबाज़ योद्धा का निधन

पूर्व सैनिक संगठन ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

देश की सेवा में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले 1962, 1965 एवं 1971 के भारतदृपाक युद्धों के जांबाज़ योद्धा कैप्टन भीम सिंह ठकुराठी का 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे बीते दिनों से कुछ अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन का समाचार मिलते ही पूर्व सैनिकों में शोक की लहर दौड़ गई। कैप्टन भीम सिंह ठकुराठी का जन्म 16 जुलाई 1935 को हुआ था।

 

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बचपन से ही उनमें भारतीय सेना में जाने का प्रबल जुनून था। वर्ष 1952 में उन्होंने प्रथम प्रयास में ही कुमाऊँ रेजीमेंट की 14वीं बटालियन में चयन पाकर अपने सैन्य जीवन की शुरुआत की। इसके पश्चात उनकी तैनाती फाइव मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री में रही। अपने गौरवशाली सैन्य करियर के दौरान उन्होंने नॉर्थ ईस्ट, अरुणाचल प्रदेश एवं जम्मू.कश्मीर जैसे दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में सेवाएं देते हुए राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

उन्होंने 1962, 1965 एवं 1971 के युद्धों में अदम्य साहस, वीरता और उत्कृष्ट नेतृत्व का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा की। सेवा काल के दौरान वे इन्फैंट्री स्कूल में इंस्ट्रक्टर के पद पर भी तैनात रहे। बाद में उन्होंने इन्फैंट्री स्कूल, महू में सूबेदार मेजर के पद पर रहते हुए अनेक युवा सैनिकों को प्रशिक्षण देकर देशसेवा के लिए प्रेरित किया।

 

वर्ष 1983 में वे कैप्टन के पद से सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका जीवन समाजसेवा और राष्ट्रभक्ति को समर्पित रहा। वे सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हुए सदैव समाज एवं पूर्व सैनिकों के हित में कार्य करते रहे। उनके निधन पर पूर्व सैनिक संगठन द्वारा उनके निवास स्थान पर पहुंचकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

 

इस अवसर पर संगठन के उपाध्यक्ष सूबेदार मेजर रमेश सिंह महर ने शोकाकुल परिवार को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। संगठन की ओर से कैप्टन महेश चंद शाही ने पुष्पचक्र अर्पित किया। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उमेद सिंह, विक्रम सिंह, दयाल सिंह, नवीन गुरुरानी, मदन सिंह, धरम सिंह एवं हरीश सिंह बिष्ट सहित अनेक पूर्व सैनिक उपस्थित थे।

 

पूर्व सैनिक संगठन ने कैप्टन भीम सिंह ठकुराठी के अतुलनीय योगदान, शौर्य और राष्ट्रभक्ति को शत-शत नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए देशसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान की अमूल्य प्रेरणा बना रहेगा।

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