पौधरोपण : औषधीय पौधों के संरक्षण का लिया संकल्प

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के ऋषिकुल परिसर में वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान पर्यावरण संरक्षण के साथ आयुर्वेद की औषधीय परंपरा को सहेजने और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों, चिकित्सकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और पीजी स्कॉलर्स ने विभिन्न औषधीय एवं पर्यावरणोपयोगी पौधों का रोपण किया।
ऋषिकुल स्नातक एवं स्नातकोत्तर एसोसिएशन के सौजन्य से आयोजित कार्यक्रम में पर्यावरणविद् एवं आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष पंत मुख्य अतिथि रहे। अध्यक्षता एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. बी.के. अग्निहोत्री और परिसर निदेशक प्रो. ओ.पी. सिंह ने संयुक्त रूप से की। डॉ. आशुतोष पंत ने कहा कि वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण भी जरूरी है।
भारतीय आयुर्वेद परंपरा में वनस्पतियों का विशेष महत्व है और औषधीय पौधे स्वास्थ्य, पर्यावरण तथा जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रो. बी.के. अग्निहोत्री ने कहा कि ऋषिकुल आयुर्वेद शिक्षा के साथ प्रकृति और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण का भी केंद्र है। उन्होंने विद्यार्थियों से पौधे लगाने के साथ उनके संरक्षण की जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया।
परिसर निदेशक प्रो. ओ.पी. सिंह ने कहा कि ऋषिकुल परिसर को हरित, स्वच्छ और औषधीय परिसर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जाएंगे। समाजसेवी योगेश पांडे, प्रो. सुरेश चौबे और डॉ. वेद भूषण शर्मा ने भी आयुर्वेद और पर्यावरण के गहरे संबंध पर विचार रखे। उन्होंने औषधीय पौधों के संरक्षण को विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम में प्रो. विनीत कुमार अग्निहोत्री, डॉ. भावना मित्तल, डॉ. पारुल शर्मा, डॉ. प्रियंका रानी, प्रो. कीर्ति वर्मा, डॉ. शोभित वार्ष्णेय, प्रो. रूबी रानी अग्रवाल, प्रो. माधवी गोस्वामी सहित अन्य शिक्षक, चिकित्सक और पीजी स्कॉलर्स मौजूद रहे। प्रचार मंत्री डॉ. अवनीश कुमार उपाध्याय ने कहा कि एक पौधा लगाना शुरुआत है, उसे वृक्ष बनाना हमारी जिम्मेदारी और प्रकृति को सुरक्षित रखना हमारा सामूहिक संकल्प है।
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