पिथौरागढ़ : ‘रन फॉर हिमालय’ अभियान के तहत धारचूला से बरेली तक दौड़ रहे नौ धावक
हिमालय संरक्षण का संदेश लेकर पूर्व सैनिकों ने शुरू की 500 किमी की दौड़

हिमालय संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और फिटनेस का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से पूर्व सैनिकों एवं सशस्त्र बलों से जुड़े कर्मियों की टीम ने धारचूला से बरेली तक 500 किलोमीटर की दौड़ शुरू की है। ‘रन फॉर हिमालय’ अभियान के तहत भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना से जुड़े नौ धावक करीब 10 दिनों में यह दूरी पूरी करेंगे।
अभियान का उद्देश्य हिमालय के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना और पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी को बढ़ावा देना है। टीम दौड़ के दौरान विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों, विद्यार्थियों और अन्य लोगों से संवाद कर उन्हें हिमालय बचाने का संदेश दे रही है।
इसी क्रम में टीम ने चार्मा से पिथौरागढ़ तक करीब 35 किलोमीटर की दूरी तय की। इस दौरान मार्ग में स्थानीय समुदायों से संवाद कर हिमालय एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर जागरूकता अभियान चलाया गया। पिथौरागढ़ स्थित जनरल बी.सी. जोशी आर्मी पब्लिक स्कूल में धावकों ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया।
उन्होंने विद्यार्थियों को हिमालय संरक्षण, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, शारीरिक फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व की जानकारी दी। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और हिमालयी क्षेत्र को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने में युवाओं की भूमिका पर भी चर्चा की।अभियान के दौरान टीम ने पिथौरागढ़ कम्युनिटी रेडियो स्टेशन पर आयोजित विशेष पॉडकास्ट में भी हिस्सा लिया।
इसमें धावकों ने पर्यावरण संरक्षण, फिटनेस, हिमालय को बचाने की आवश्यकता और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में जनभागीदारी जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। टीम का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल 500 किलोमीटर की दूरी तय करना नहीं, बल्कि दौड़ को फिटनेस और पर्यावरण जागरूकता का माध्यम बनाकर अधिक से अधिक लोगों को हिमालय संरक्षण के लिए प्रेरित करना है।
टीम यात्रा के दौरान विद्यार्थियों, स्थानीय समुदायों और विभिन्न हितधारकों से संवाद कर रही है। अभियान के माध्यम से युवाओं और आम नागरिकों को संदेश दिया जा रहा है कि फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं। हिमालय जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए सरकार और संस्थाओं के साथ प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
टीम अपनी आगे की यात्रा जारी रखते हुए बरेली पहुंचेगी और इस दौरान ‘हिमालय बचाओ’ का संदेश जन-जन तक पहुंचाएगी। अभियान के माध्यम से लोगों से हिमालय और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को अपनी साझा जिम्मेदारी मानते हुए पर्यावरण के प्रति संवेदनशील एवं जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का आह्वान किया जा रहा है।
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