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कठिनाइयों को हराकर आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं गीता

सेलपेडू गांव की साधारण गृहिणी बनीं सफल उद्यमी, एनआरएलएम ने संवारा जीवन

आज महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की जीती-जागती मिसाल बन चुकी गीता के सामने पति के असामयिक निधन के बाद जहां  बच्चों की परवरिश, आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव जैसी कई चुनौतियाँ थीं, वहीं उन्होंने इन मुश्किलों के आगे झुकने के बजाय कुछ कर गुजरने की ठान ली। उन्होंने खुद को संभाला और स्वरोजगार की राह चुनी।

 

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चंपावत जनपद के लोहाघाट विकासखंड के छोटे से गांव सेलपेडू की गीता पंत आज महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की जीती-जागती मिसाल बन चुकी हैं। एक समय था जब गीता एक साधारण गृहिणी के रूप में घर-गृहस्थी में व्यस्त थीं, लेकिन वर्ष 2020 में जीवन ने करवट ली और मात्र 40 वर्ष की आयु में पति के असामयिक निधन ने पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर डाल दी।

 

पति की मृत्यु के बाद जहां गीता के सामने बच्चों की परवरिश, आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव जैसी कई चुनौतियाँ सामने थीं, वहीं उन्होंने इन मुश्किलों के आगे झुकने के बजाय कुछ कर गुजरने की ठान ली। उन्होंने खुद को संभाला और स्वरोजगार की राह चुनी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत गठित ‘प्रगति स्वयं सहायता समूह’ से जुड़कर गीता ने अपने सपनों को उड़ान दी।

 

समूह से मिलने वाली वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन से उन्होंने पहले एक छोटा ब्यूटी पार्लर और सिलाई केंद्र शुरू किया। बाद में ग्राम संगठन से 1.5 लाख रुपये का ऋण और अपनी 50,000 की बचत जोड़कर कुल 02 लाख रूपए से अपने उद्यम का विस्तार किया। आज गीता के पास एक सुसज्जित ब्यूटी पार्लर है जिसमें अत्याधुनिक उपकरण, कॉस्मेटिक सामग्री, हेयर-स्किन केयर किट और प्रशिक्षित सेवाएं उपलब्ध हैं।

 

साथ ही उनके सिलाई केंद्र में लेडीज गारमेंट्स और रेडीमेड कपड़ों की अच्छी खासी मांग है। गीता ने बताया कि वे अब प्रतिमाह 10,000 से 12,000 तक की आय अर्जित कर रही हैं। उनका यह उद्यम न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती दे रहा है, बल्कि गांव में अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है। कई महिलाएं अब गीता से प्रेरित होकर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ रही हैं।

 

गीता का कहना है कि एनआरएलएम से जुड़ना मेरे लिए नया जीवन पाने जैसा है। इसने न केवल आर्थिक मदद दी, बल्कि मुझे आत्मविश्वास, पहचान और स्वाभिमान भी दिया। अब मेरा सपना है कि मैं इसे एक बड़ा ब्यूटी एंड बुटीक सेंटर बनाऊं और अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ू।

 

गीता की सफलता से उत्साहित होकर अब सेलपेडू सहित आसपास के गांवों की महिलाएं भी समूहों से जुड़ने और स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाने लगी हैं। एनआरएलएम की यह योजना न केवल आर्थिक सशक्तिकरण कर रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को सामाजिक और आत्मिक स्तर पर भी मजबूत बना रही है।

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