पिथौरागढ़ : 43 सप्ताह की गर्भावस्था के बाद जटिल प्रसव, सीएचसी के चिकित्सकों ने बचाई दो जिंदगियां
सीमित संसाधनों के बीच दो घंटे की मशक्कत के बाद कराया सफल सामान्य प्रसव, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ

सीमांत क्षेत्र मुनस्यारी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों ने सीमित संसाधनों के बीच एक बेहद जटिल प्रसव को सफलतापूर्वक संपन्न कर मां और नवजात शिशु की जान बचा ली। एलएमओ डा. नलिनी पांगती ने बताया कि समकोट निवासी 26 वर्षीय ममता देवी, पत्नी प्रवीन सिंह, को गुरुवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर परिजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुनस्यारी लेकर पहुंचे।
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अजय कुमार की देखरेख में जांच के दौरान पता चला कि ममता देवी की संभावित प्रसव तिथि 28 मई 2026 निर्धारित थी, लेकिन गर्भावस्था 43 सप्ताह से अधिक हो चुकी थी। इससे मां और शिशु दोनों के लिए खतरा काफी बढ़ गया था। आशा कार्यकर्ता और एएनएम के माध्यम से पूर्व में उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बुलाकर काउंसलिंग की गई थी तथा जिला महिला अस्पताल में प्रसव कराने की सलाह भी दी गई थी, लेकिन वह वहां नहीं जा सकीं।
गुरुवार को अस्पताल पहुंचने पर जांच में यह भी सामने आया कि शिशु गर्भ में ही मल त्याग (मीकोनियम) कर चुका था, जो गंभीर स्थिति का संकेत था। वहीं गर्भाशय का मुंह पूरी तरह खुल चुका था, जिससे उन्हें हायर सेंटर रेफर करना संभव नहीं था। ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में एलएमओ डॉ. नलिनी पांगती सहित चिकित्सकीय टीम ने धैर्य और सूझबूझ का परिचय देते हुए करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सफल सामान्य प्रसव कराया। ममता देवी ने तीन किलोग्राम वजन के स्वस्थ नवजात शिशु को जन्म दिया।
सफल प्रसव के बाद चिकित्सकों और परिजनों ने राहत की सांस ली। डॉ. नलिनी पांगती ने बताया कि जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं तथा एहतियात के तौर पर उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुनस्यारी में चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। चिकित्सकों के अनुसार सामान्य गर्भावस्था की अवधि 37 से 40 सप्ताह तक मानी जाती है। 42 सप्ताह से अधिक गर्भावस्था होने पर मां और शिशु दोनों के लिए प्रसव संबंधी जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में नियमित चिकित्सकीय जांच और विशेषज्ञ की सलाह बेहद जरूरी होती है।
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