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पिथौरागढ़ : मानसून पूर्व तैयारियों को परखने के लिए पांच स्थानों पर मॉक अभ्यास आयोजित

रेस्क्यू टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राहत एवं बचाव कार्यों का किया सफल अभ्यास

आगामी मानसून सीजन के दौरान संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियों का जायजा लिया। गुरुवार को जनपद के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक अभ्यास (मॉक ड्रिल) आयोजित किया गया,

 

जिसमें भूस्खलन, बोल्डर गिरने, नदी के जलस्तर में वृद्धि तथा मार्ग अवरुद्ध होने जैसी आपदा परिस्थितियों का सजीव अभ्यास कर राहत एवं बचाव तंत्र की तत्परता को परखा गया। मॉक अभ्यास का उद्देश्य आपदा की वास्तविक स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत बनाना तथा राहत एवं बचाव कार्यों की प्रभावशीलता का परीक्षण करना था।

 

मुनस्यारी तहसील के ग्राम धापा में बोल्डर गिरने की काल्पनिक घटना पर आधारित अभ्यास किया गया। परिदृश्य के अनुसार एक भवन पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त, दो भवन आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त तथा एक गौशाला प्रभावित दिखाई गई। घटना में दो लोगों के गंभीर रूप से घायल, दो अन्य के सामान्य रूप से घायल तथा एक व्यक्ति की मृत्यु होने के साथ ही दो बकरियों के घायल होने की स्थिति बनाई गई। रेस्क्यू टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राहत एवं बचाव कार्यों का सफल अभ्यास किया।

 

तहसील बंगापानी के बरम क्षेत्र में गोरीगंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि की स्थिति का मॉक अभ्यास किया गया। इस दौरान नदी में फंसे चार लोगों और दो बकरियों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविर तक पहुंचाया गया तथा घायलों को उपचार उपलब्ध कराया गया। साथ ही तीन आवासीय भवनों को खतरे की जद में दर्शाते हुए वहां निवास कर रहे लोगों को राजकीय इंटर कॉलेज बरम स्थित राहत शिविर में स्थानांतरित कर आवश्यक राहत सामग्री वितरित की गई।

 

धारचूला तहसील में एनएचपीसी पावर परियोजना के समीप भूस्खलन के कारण टनल में लोगों के फंसने का परिदृश्य तैयार किया गया। रेस्क्यू टीमों ने टनल के दोनों सिरों से मलबा हटाकर भीतर फंसे 30 लोगों, जिनमें पांच अधिकारी और 25 कर्मचारी शामिल थे, को सुरक्षित बाहर निकाला। अभ्यास के दौरान घायल दर्शाए गए दो कर्मचारियों को प्राथमिक उपचार देने के बाद उप जिला चिकित्सालय धारचूला भेजा गया।

 

इसी क्रम में कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग के मलघाट क्षेत्र में भूस्खलन एवं हिमस्खलन से मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति का भी अभ्यास किया गया। इस परिदृश्य में लगभग 80 से 100 वाहनों और 450 से 500 यात्रियों के फंसने की स्थिति बनाई गई। मलबे की चपेट में आने से आठ लोगों के घायल होने का अभ्यास किया गया, जिन्हें रेस्क्यू टीमों ने सुरक्षित निकालकर एम्बुलेंस के माध्यम से उपचार के लिए

 

उप जिला चिकित्सालय धारचूला पहुंचाया। इसके बाद सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा मार्ग को पुनः यातायात के लिए सुचारू करने का प्रदर्शन किया गया। एक अन्य अभ्यास धारचूला-तवाघाट मोटर मार्ग पर राउंती पुल के निकट किया गया, जहां भूस्खलन और बोल्डर गिरने से मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति बनाई गई।

 

इस दौरान 30 से 40 वाहनों में फंसे लगभग 150 यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया तथा बीआरओ की टीम ने मार्ग को दोबारा यातायात के लिए बहाल करने की कार्रवाई का सफल प्रदर्शन किया। मॉक अभ्यास में जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, सीमा सड़क संगठन, एनएचपीसी, राजस्व विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने समन्वित रूप से भागीदारी निभाई।

 

अधिकारियों के अनुसार इस अभ्यास से आपदा की वास्तविक परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, विभागीय समन्वय और राहत-बचाव व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया, जिससे आगामी मानसून सीजन के दौरान किसी भी आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने में सहायता मिलेगी।

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