हांगकांग में सम्मानित हुईं डॉ. राधा वाल्मीकि, शोध-पत्र वाचन पर मिली सराहना
इंस्पायरिंग ट्रैवलर अवार्ड से भी नवाजी गईं

हांगकांग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में हिंदी के वैश्विक प्रचार-प्रसार तथा “वैश्विक विकास में संस्कृति और विज्ञान की भूमिका” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में डॉ. राधा वाल्मीकि ने अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया। सेमिनार में भारत के विभिन्न राज्यों के प्रोफेसर, शोधार्थी, साहित्यकार तथा कई देशों के शिक्षाविद और विशेषज्ञ शामिल हुए।
अपने शोध-पत्र में डॉ. राधा वाल्मीकि ने कहा कि संस्कृति और विज्ञान मानव सभ्यता के विकास के दो प्रमुख स्तंभ हैं। संस्कृति जहां समाज को नैतिक मूल्य, मानवीय संवेदनाएं और सकारात्मक दिशा प्रदान करती है, वहीं विज्ञान जीवन को सरल, सुगम और सुविधाजनक बनाता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान और संस्कृति का संतुलित समन्वय ही समावेशी एवं शांतिपूर्ण भविष्य का आधार बन सकता है।
उन्होंने कहा कि समय के साथ विज्ञान और संस्कृति दोनों में कुछ विकृतियां उत्पन्न हो जाती हैं। विज्ञान की कमियों को तकनीकी स्तर पर सुधारा जा सकता है, लेकिन सामाजिक कुरीतियां और जाति प्रथा जैसी समस्याएं लंबे समय तक समाज को प्रभावित करती हैं। इन्हें दूर करने के लिए सकारात्मक सोच और सुधारवादी दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
डॉ. वाल्मीकि के विचारों की उपस्थित विद्वानों ने सराहना की। शोध-पत्र वाचन के उपरांत उन्हें स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र और प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं हॉलीडे टर्मिनस टूरिज्म मकाऊ एंड हांगकांग टूर-2026 के शैक्षिक भ्रमण संयोजक मनीष सुंदरियाल ने उन्हें “इंस्पायरिंग ट्रैवलर अवार्ड” से सम्मानित किया।
उल्लेखनीय है कि डॉ. राधा वाल्मीकि ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी से जूझते हुए लगभग 75 प्रतिशत दृष्टि खोने के बावजूद अपने दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के बल पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। अपनी इस उपलब्धि पर उन्होंने सेमिनार के आयोजक साहित्य संचय शोध संवाद फाउंडेशन, दिल्ली के अध्यक्ष मनोज कुमार तथा शैक्षिक भ्रमण संयोजक मनीष सुंदरियाल का आभार व्यक्त किया। स्वदेश लौटने पर परिजनों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
हमसे जुड़ें और अपडेट्स पाएं!
सबसे नए समाचार और अपडेट्स पाने के लिए जुड़े रहें।







